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कौन आज़ाद हुआ?

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सौरभ बाजपेयी 
उर्दू के मशहूर शायर अली सरदार जाफरी ने अपनी एक नज़्म के जरिये कभी पूछा था— कौन आज़ाद हुआ? उनके स्वर में 15 अगस्त 1947 को मिली राजनीतिक आज़ादी को लेकर एक तंज था जो “यह आज़ादी झूठी है” के नारे से उपजा था. हमारे लिए वो आज़ादी झूठी नहीं थी, सोलह आने सच्ची थी. फिर भी हम उनसे यह सवाल आज अपने देशवासियों से पूछने के लिए उधार लेते हैं. आखिर हमारे पुरखों ने किस चीज़ के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी? क्या अंग्रेज सिर्फ एक नस्ल का नाम था या वो हमारे दुश्मन सिर्फ इसलिए थे कि वो किसी और देश के बासिन्दे थे? आज़ादी के मतवाले किस चीज़ के खिलाफ लड़े और क्या जीते थे? आखिर पंद्रह अगस्त के उस दिन ऐसा क्या बदला था कि हम पिछले 70 बरस से उस दिन का जश्न मनाना अपना फ़र्ज़ समझते हैं. और सबसे बड़ा सवाल— क्या उस दिन कुछ ऐसा हुआ था जिसके बाद इस देश के लिए लड़ने की जरूरत ख़त्म हो गयी थी. 
मेरे देशवासियों, आपकी याददाश्त ख़त्म हो रही है इसलिए बताना जरूरी है. 15 अगस्त के पहले इस देश का राज सात समंदर पार बैठी महारानी विक्टोरिया चलाती थीं. वहाँ से नीतियाँ बनकर आती थीं और इस विशाल देश की विशाल आबादी पर थोप दी जाती थीं. यह हमारे फायदे…

करो या मरो

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मृदुला मुख़र्जी 
(भारत का स्वतंत्रता संघर्ष पुस्तक से साभार )

....यों तो गांधीजी आने वाले संघर्ष के बारे में चर्चा करते ही आ रहे थे, पर अब देर करना उन्हें गलत लगने लगा था. उन्होंने कांग्रेस को यह चुनौती भी दे डाली थी कि अगर उसने संघर्ष का उसका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो “मैं देश की बालू से ही कांग्रेस से भी बड़ा आन्दोलन खड़ा कर दूंगा.” नतीजतन कांग्रेस कार्यसमिति ने वर्धा की अपनी बैठक (14 जुलाई 1942) में संघर्ष के निर्णय को अपनी स्वीकृति दे दी. अगले महीने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक होने वाली थी, जिसमें इस प्रस्ताव का अनुमोदन होना था. यह ऐतिहासिक सभा बम्बई के ग्वालिया टैंक में हुयी. जनता का उत्साह देखते ही बनता था. अन्दर तो नेता विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे थे और बाहर जनसमुद्र उमड़ रहा था. नेताओं का निर्णय जानने की उत्सुकता इतनी थी कि खुले अधिवेशन में जब भाषण होने लगे, तो हजारों- हजार की भीड़ होने के बावजूद सभा में पूरी शान्ति थी.
करो या मरो  गांधीजी के भाषण का बिजली जैसा असर हुआ. सबसे पहले तो उन्होंने यह स्पष्ट किया कि “असली संघर्ष इसी क्षण से शुरू नहीं हो रहा है. आपने सि…