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Showing posts from September, 2016

भगत सिंह और सांप्रदायिकता का सवाल

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शुभनीत कौशिक 
सांप्रदायिकता के सवाल पर विचार करते हुए क्रांतिकारी विचारक भगत सिंह ने ‘किरती’ पत्रिका में मई-जून 1928 में दो विचारोत्तेजक लेख लिखे थे। ये लेख न सिर्फ़ अपने ऐतिहासिक संदर्भ और सांप्रदायिकता के प्रश्न पर अंतर्दृष्टि देने के लिए पढ़े जाने चाहिए, बल्कि भारत की वर्तमान स्थिति में ये लेख तो पहले से ज़्यादा प्रासंगिक हो जाने के कारण और पठनीय हो चले हैं। 

आइए, सबसे पहले पढ़ते हैं और सिलसिलेवार ढंग से विचार करते हैं, जून 1928 में ‘किरती’ पत्रिका में छपे उनके लेख पर, जिसका शीर्षक था: ‘सांप्रदायिक दंगे और उनका इलाज’। इस लेख की पहली पंक्तियों में यह आशावादी क्रांतिकारी विचारक कुछ निराश-सा जान पड़ता है तत्कालीन हिंदुस्तान की दशा से। वे लिखते हैं, ‘भारतवर्ष की दशा इस समय बड़ी दयनीय है। एक धर्म के अनुयायी दूसरे धर्म के अनुयायियों जानी दुश्मन हैं। अब तो एक धर्म के होना ही दूसरे धर्म के कट्टर शत्रु होना है’। वे देखते हैं कि किसी व्यक्ति का हिन्दू, मुस्लिम या सिख होना भर ही काफी है उसके मारे जाने के लिए। ऐसी स्थिति में, भगत सिंह को भारत का भविष्य अंधकारमय नजर आता है। क्या आज 2015 के भारत में ह…

Communalism: A Primer (Reading through Posters)

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(Selected and designed by Richa Raj)

तो इसलिए बिपन चन्द्र की किताब हटाना चाहता है आरएसएस

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अटल तिवारी स्वाधीन, 11/9/2016
“मैं नेशनल बुक ट्रस्ट के काम में किसी तरह का विवाद या राजनीति नहीं लाना चाहता।” यह बात ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए जाने पर करीब डेढ़ साल पहले बलदेव भाई शर्मा ने मार्च 2015 में कही थी, लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ के संपादक रहे बलदेव भाई शर्मा अपनी कही बात पर ज्यादा दिन तक कायम नहीं रह सके। उनकी अध्यक्षता में चल रहे चल रहे ट्रस्ट ने नौ अगस्त को आधुनिक भारत के प्रमुख इतिहासकार बिपन चन्द्र की किताब ‘सांप्रदायिकता : एक प्रवेशिका’ न छापने जैसा चकित करने वाला फैसला ले लिया। बताया जाता है कि बिपन चन्द्र की इस किताब का 49 लाख रुपए का आर्डर ट्रस्ट को मिला था, जिसे बिना किसी उचित कारण के अचानक उसने रोक दिया। मजे की बात यह कि मुख्यधारा के मीडिया ने इसका संज्ञान तक नहीं लिया। वैसे सांप्रदायिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाने वाले कारपोरेट मीडिया से ऐसी उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए कि वह इसका संज्ञान लेगा। खैर! अंग्रेजी के एक अखबार ने तीन सप्ताह बाद इस समाचार को प्रकाशित किया, जिसमें यह भी बताया गया कि इस किताब के अंग्रेजी संस्करण ‘कम्युनल…

बिपिन चन्द्र की पुस्तक पर भगवा हमला : भगतसिंह बनाम क्रान्तिकारी आतंकवाद

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अखिल आह्वान, मई-जून 2016