Posts

Showing posts from June, 2015

मोदी सरकार का एक साल : वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक सद्भाव पर प्रहार

Image
अटल तिवारी समकालीन तीसरी दुनिया, मई 2015 
[मोदी के एक साल पूरे होने पर अटल तिवारी की यह समीक्षा कुछ ख़ास है. पूरे कामकाज के मूल्यांकन में उलझने की बजाय उन्होंने सिर्फ साम्प्रदायिकता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया है. इसमें न सिर्फ संघियों की विज्ञान के प्रति समझ शामिल है बल्कि राजनीति में बाबाओं की भूमिका, खुद को संत- साध्वी कहने वालों के जहरबुझे वक्तव्य से लेकर धर्म और राजनीति के घालमेल तक शामिल हैं. पेश है मोदी के पहले एक साल में साम्प्रदायीकरण का लेखा-जोखा...] 
बीसवीं सदी के अंतिम डेढ़ दशक धर्म और राजनीति के घालमेल के पुनरुत्थान वाले रहे हैं। मंडल आयोग की रिपोर्ट आने के बाद संघ परिवार खुलेआम धर्म आधारित राजनीति को बढ़ावा देने लगा था और उसके संसदीय मुखौटे लालकृष्ण आडवाणी रथ यात्रा के जरिए साम्प्रदायिक विचारधारा का फैलाव करने में लग गए थे। दोनों (भाजपा व संघ परिवार) के द्वारा मिल-जुलकर समूचे देश में बोया गया साम्प्रदायिकता का बीज आने वाले समय में बाबरी मस्जिद के विध्वंस का कारण बना था। इस बीच दोनों योजनाबद्ध तरीके से धार्मिक कट्टरता को तूल देते हुए अपना विस्तार करते गए। धर्म आधारित रा…

Gita, Gandhi and Godse

[Amidst all the controversies over Gita, it must be remembered that it is not Gita itself but its interpretation which creates all the difference. This article must be read to understand that “both Nathuram Godse and Mahatma Gandhi read the Bhagavad Gita but one became a martyr and the other a murderer”...]
Varghese K. George The Hindu, January 30, 2015
Both Nathuram Godse and Mahatma Gandhi read the Bhagavad Gita but one became a martyr and the other a murderer...
January 30 reminds us of the fact that even the holiest of texts can have subjective and differential meanings. The sacred Indian verses of Shrimad Bhagavad Gita has been in the news for various reasons in recent months. Prime Minister Narendra Modi presented a copy of the Bhagavad Gita to United States President Barack Obama when he visited the White House last year and one to Emperor Akihito of Japan. He has declared that the Gita would be the gift that he would carry for all world leaders. More controversially, Union Minist…

नेहरू के पक्ष में एक विचारोत्तेजक चिट्ठी

Image
[जनसत्ता के ६ जून के लेख पर रामलाल भारतीजी ने रीवां (मध्य प्रदेश) से यह चिट्ठी भेजी. यह चिट्ठी अपने आप में एक छोटा लेख जान पड़ा. विषय की गहराई से समझ रखने वाले भारतीजी की चिट्ठी से यह यकीन पुख्ता हुआ कि अभी भी हमारी समझ वाले लोगों की भारी तादात है. इसलिए यह लेखनुमा चिट्ठी आप सबके साथ शेयर की जा रही है. साथ ही प्रसंगवश लेख का लिंक भी...
रामलाल भारती गौरी,रीवा,म.प्र. जनसत्ता के ६ जून,२०१५ अंक में आपका लेख ' नेहरू को नकारने के निहितार्थ ' पढा, आश्चर्य के साथ। मैं चाहूं तो जो मैं सोचता हूँ उसे  लिख लेने के लिए आप पर प्लेजरिज़्म  (plagiarism) का आरोप लगा सकता हूँ  मगर नेहरू जैसे नालायक को उनके वक्त के परिप्रेक्ष्य में देखने की चाह रखने वाला मैं इकलौता नालायक नहीं हूँ इस खुशी में चलिए आपको क्षमा किया। ऐसे समय में जब नेहरू को गाली देना भारी उद्योग का रूप ले चुका है तथा बौद्धिक,ज्ञानवंत और देशभक्त होने का इकलौता पैमाना भी,नेहरू में कुछ सकारात्मक 'भी 'देखने की मांग करना साहसिक है। वैसे लेख के ही अनुसार मूल्यों के हक में नेहरू अलोकप्रिय होने का खतरा उठा सकते थे इसलिए तो आप का ऐसा …