12 August 2015

खींचो कमान खींचो

मित्रों, ‘स्वाधीन’ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी यादों को स्मृति में बनाये रखने और उससे सीख लेने को प्रेरित करता रहा है. इस बात को ध्यान में रखकर उसने अपने पाठकों के लिए हमेशा शब्दों का पिटारा पेश किया है. अब जब स्वतंत्रता दिवस को तीन दिन शेष हैं तो इस मौके पर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े गीतों की एक सीरीज पेश की जा रही है. इस कड़ी में आज रामचन्द्र द्वेदी ‘प्रदीप’ का गीत ‘स्वाधीन’ के पाठकों के लिए पेश है. गीत में इस्तेमाल की गई पंक्ति ‘खींचो कमान खींचो’ को आज के दौर में राष्ट्रीय आंदोलन पर हमला करने वालों को जवाब देने के तौर पर लिया जाये, जिसमें तीर-कमान हिंसक हथियार नहीं बल्कि अहिंसक प्रतिरोध का प्रतीक हैं...

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रामचन्द्र द्वेदी ‘प्रदीप’

खींचो कमान खींचो
ओ भारत माँ के नौजवान खींचो
आज निशाना चूक न जाना
पिछली गल्ती मत दोहराना
वरना फिर होगा पछताना
जगह-जगह तूफान बवंडर आँखें मत मीचो
खींचो कमान खींचो
जो भीख मांगने से दर दर
आजादी मिलती हो घर घर
लानत ऐसी आजादी पर
ओ वीरों की संतान देश को तीरों से सींचो
खींचो कमान खींचो.



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