26 August 2017

ganga aaye kahan se



गंगा आये कहाँ से, 
गंगा जाये कहाँ रे 
आये कहाँ से, जाये कहाँ रे 
लहराये पानी में जैसे धूप-छाँव रे 
गंगा आये कहाँ से, 
गंगा जाये कहाँ रे 
लहराये पानी में जैसे धूप-छाँव रे 

रात कारी दिन उजियारा 
मिल गये दोनों साये 
साँझ ने देखो रंग रुप के कैसे भेद मिटाये 
लहराये पानी में जैसे धूप-छाँव रे ... 

काँच कोई माटी कोई रंग-बिरंगे प्याले 
प्यास लगे तो एक बराबर जिस में पानी डाले 
लहराये पानी में जैसे धूप-छाँव रे ...

नाम कोई बोली कोई 
लाखों रूप और चेहरे 
खोल के देखो प्यार की आँखें सब तेरे सब मेरे 
लहराये पानी में जैसे धूप-छाँव रे ...

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